आजादी के बाद की स्थितियां

देश ने निश्चित रूप से आजादी के बाद उन्नति की है । हमारी याद में ही न तो गांवों में बिजलीं थी और न सड़के , बेतरतीब शहर और बन्दोबस्त , बैलगाड़ी इक्का और इलाज की व्यवस्था भी नहीं ।।


लेकिन इसका दूसरा पहलू है अगर हम आजाद भारत के वक्त से आज तक के सफर पर नज़र डालें तो निश्चित ही इतरा सकते हैं , लेकिन दूसरा पहलू है कि यदि हम दुनिया के विकसित हुए उन देशों से तुलना करें जो हमसे गरीब थे तो घोर निराशा हाथ लगती है ।
गरीब अर्थव्यवस्था के सारे लक्षण हमारे देश मे मौजूद हैं बढ़ती आबादी , न्याय न मिलना , पलायन , आत्महत्या , बेडौल शरीर के बुझे चेहरे, कोई टूरिस्म नहीं , कोई मस्ती नाच गाना नहीं पिकनिक और खुशियों के मस्त पल नहीं, खेल क्लब या सामूहिक आयोजन नहीं । ये हैं तो सामाजिक रस्म वाले हैं अर्थात मजबूरी वाले खुद के नहीं ।
बड़ी आबादी शाम तक के खाने का प्रबंध ढूंढती है फ्री राशन को स्वीकारती है , रिश्वत अधिकार है , कर्तव्य से बड़े नौकरी की सुरक्षा है , जाति धर्म मीडिया और प्रभावशालियों के असर से न्याय दूसरे रूप में अन्याय मिलता है ।
जिनके पास शक्ति है वो उतने ही दुर्व्यवहारी हैं । राजनीतिक शक्ति जिस के पास है उसकी सुनवाई बाकि को दुत्कार , सफलता का आधार आपके संबंध है जो उपहार पैसा देकर पैर छूकर खुशामद चापलूसी से पाते हैं । जातीय समीकरण।
बेईमान संगठित हैं ईमानदार दूसरे ईमानदार को प्रश्रय नहीं देते हैं ।
अर्थशास्त्र पर राजनीति भारी है, अर्थशास्त्र हम उसका मानते है जो राजनीतिक नजरिये से भरा हो ।
सिर्फ एक उदाहरण चीन है जो 1978 में हमसे भी गरीब था आज इतना आगे है जितना दिल्ली से मुम्बई और 500 की स्पीड भी और हम 100 की स्पीड सेगर्व करें पर संभल कर ।

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