फेरोमोन ट्रॅप

फेरोमोन ट्रॅप कैसे काम करता हैं?
उत्तर:-
अगर यह कहा जाए कि कामगंध जाल (फेरोमोन ट्रॅप) फसल सुरक्षा के लिए वरदान है,तो भी अतिशयोक्ति नहीं होगी। पिछले 40-50 वर्षों में कीटनाशकों के छिड़काव के बिना खेती पूरी नहीं होती,ऐसा समीकरण बन गया है। और परिणाम में यह त्वचा रोगों, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर और जन्मजात विकृतियों से ग्रस्त एसी घातक बिमारिया उभर कर आ रही हैं। अगर हम इसे रोकना हैं और अगली पीढ़ी को बेहतर स्वास्थ्य के साथ जैविक-टिकाऊ खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं, तो एकीकृत कीट प्रबंधन को अपनाना और उसमें कामगंध जाल(फेरोमोन ट्रॅप) का उपयोग करना अनिवार्य है।
फेरोमोन ट्रॅप में दो मुख्य भाग होते हैं, एक ल्युर और दुसरा ट्रॅप। ल्युर अपने गंध से विशिष्ट प्रजाती के कीटों को आकर्षित करता है और ट्रॅप का उपयोग कीटों को फंसाने के लिए किया जाता है। फेरोमोन एक प्राकृतिक पदार्थ हैं,जो कीड़ों के पेट में विशेष ग्रंथियों के माध्यम से वातावरण में फैलता हैं, जिस कारन एक ही प्रजाति के विषमलैंगिक कीट/पतंगा ऊस तरफ आकर्षित होता हैं। कीटों की कई प्रजातियों के फेरोमोन को एकीकृत कीट प्रबंधन में उपयोग के लिए कृत्रिम रूप से प्लास्टिक या लकड़ी के ब्लॉक में शामिल किया जाता है। इसे ल्युर कहते है। यह ल्युर ट्रॅप के अंदर लगानी पडती हैं।
फेरोमोन ट्रॅप का उपयोग खेत में कीटों की निगरानी और नियंत्रण दोनों के लिए किया जा सकता है। कीट सर्वेक्षण (निगरानी) के लिए 10-12 ट्रॅप/एकर जिसमे सर्वेक्षण के साथ-साथ किट प्रतिबंध होता हैं,और बड़ी संख्या में पतंगों को पकड़ने के लिए 15-25 ट्रॅप/एकर (मास ट्रैपिंग) जो किट को 80% से उपर नियंत्रित करता है। एक प्रकार से यह ट्रॅप अपने खेत का आईना होते हैं।हमने जिस तरह से खेत का प्रबंध किया है, उसका पूरा लेखा-जोखा ट्रॅप में अटकने वाले कीड़ों कि संख्या सें देखा जा सकता है। मान लीजिए आप प्रति एकड़ 10 ट्रॅप लगाते हैं और अगले कुछ दिनों में हर एक ट्रॅप में औसतन 2-3 पतंगें अटकी हुई पाते हैं, तो ट्रॅप आपको बताते हैं कि जिस दिन से पतंगें मिलीं, उस दिन से कीट आपके खेत में घुसपैठ कर चुके हैं। यदि ट्रॅप में पाए जाने वाले कीड़ों की संख्या दिन-प्रति-दिन बढ़ती जाती है, तो खेत में कीटों की संख्या बढ़ रही है,ऐसा ट्रॅप हमें दर्शाते हैं। उसके अनुसार हम छिड़काव की अगली दिशा तय कर सकते हैं उससे बिना वजह होनेवाली छिड़काव की लागत को कम करने में मदद होती है। सर्वेक्षण के माध्यम से कीट नियंत्रण शुरू से होता है। कीट कि संख्या आर्थिक नुकसान स्तर के उपर तक नहीं जाते। पर्यावरण के अनुकूल कीट प्रबंधन रसायनों के उपयोग के बिना किया जाता है।मुख्य बात यह है कि आप यह ट्रॅप एक स्प्रे पर लगने वाले खर्चे मे खरीद सकते हैं। यह बात हर फसल पर समान रूप से लागू होती है, इसलिए अपनी फसल के अनुसार आनेवाली कीड़ों की पहचान करें और अपने खेत में बुवाई के बाद किट के लिए तुरंत ट्रॅप लगवाए। अपनी फसल को कीटों और बीमारियों से मुक्त रखें। अपने खर्चों को कम करने की योजना बनाये

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