विश्व युद्धों का इतिहास

विश्वयुद्धों का #इतिहास एवं #परिणति और आज की परमाणु,जैविक, रासायनिक वेपन्स संपन्नता के दौर में मानव सभ्यता के पूर्णतया,आंशिक विनाश की आशंकाएं….

साभार- पंडित कृष्ण गोपाल गोलछा की पोस्ट से एडिटेड।

प्रथम #विश्वयुद्ध : 8 जून 1914 को ऑस्ट्रिया और हंगरी साम्राज्य के उत्तराधिकारी आर्क ड्यूक फ्रांज फार्डिनैंड अपनी पत्नी सोफी के साथ बोस्निया में साराएवो के दौरे पर थे, वहां दोनों की सर्ब राष्ट्रवादी गैवरिलो प्रिंसिप ने हत्या कर दी….. इसके बाद 28 जुलाई को ऑस्ट्रिया-हंगरी ने सर्बिया के खिलाफ युद्ध का एलान किया और वैश्विक संकट बढ़ता गया क्योंकि 1 अगस्त को जर्मनी ने रूस और दो दिन बाद फ्रांस के साथ युद्ध शुरू कर दिया….. इस तरह विश्व दो खेमो में बंट गया और लगातार चार साल और साढ़े तीन महीने तक चले इस युद्ध में 30 देश शामिल थे….. जिसमें सर्बिया, ब्रिटेन, जापान, रूस, फ्रांस, इटली और अमेरिका समेत करीब 17 मित्र देश एक तरफ थे तथा दूसरी तरफ जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी, बुल्गारिया और ऑटोमन जैसे 13 मित्र देश थे…. पहला l

विश्वयुद्ध पांच महा-द्वीपो (यूरोप, अफ्रीका, एशिया, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका) में लड़ा गया और 28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चला था ! इस विश्व युद्ध में करीब 6 करोड़ 82 लाख सैनिक लड़े जिनमें से 99 लाख 11 हजार सैनिक मारे गये (इस युद्ध में 75 हजार भारतीय सैनिक भी ब्रिटेन की तरफ से शामिल थे जबकि भारतीय महाद्वीप का या एशिया का इसमें कोई लेना-देना ही नहीं था) प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल्सन ने पेरिस में एक विश्व शांति सम्मलेन का आयोजन किया जिसमें विश्व के विभिन्न देशों के राष्टाध्यक्षों ने भाग लिया और बहस में विश्वयुद्ध का दोषी जर्मनी सिद्ध हुआ जिससे जर्मनी पर जुर्माना लगाया गया और उसे आर्म्ड फाॅर्स रखने के अधिकार से वंचित कर दिया गया लेकिन देश की कानून-व्यवस्था को कायम रखने के लिये पुलिस रखने का अधिकार यथावत रखा गया लेकिन माइनर आर्म्ड के साथ…. इस तरह जर्मनी को हर तरह से अपमान सहना पड़ा, उसके बाद विश्व में शांति स्थापित रखने के लिये राष्ट्रसंघ की स्थापना की गई और प्रथम विश्व युद्ध का पटाक्षेप हुआ !

द्वितीय #विश्वयुद्ध…

1936 में एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी के राइनलैंड में अपनी सैन्य क्षमता बढानें का काम शुरू किया.. 7 जुलाई 1937 को मार्को पोलो पुल हादसा हुआ था जिसके कारण जापान ने चीन पर आक्रमण कर दिया (इन दोनों देशो के बीच चलने वाला ये सबसे लम्बा युद्ध माना जाता है) आखिर में जापान की ओर से सरेंडर करने के बाद युद्ध खत्म हुआ….. इसके बाद 1 सितम्बर 1939 को जर्मनी नें पोलैंड में घुसपैठ की जिसके कारण ब्रिटेन और फ़्रांस नें हिटलर के नाजी राज्य से बदला लेने की घोषणा कर दी और विश्वयुद्ध छिड़ गया…. दूसरा विश्व युद्ध यूरोप में 1939 से सितंबर 1945 तक चला और इसमें लगभग 70 देशों की थल-जल-वायु सेना शामिल थी…. इस विश्वयुद्ध में सभी वैश्विक देश मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र, ऐसे दो भागो में बंटे हुए थे और इस विश्वयुद्ध में लिप्त सारी महाशक्तियों ने अपनी आर्थिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक क्षमता झोंक दी थी…. युद्ध में अलग-अलग देशों के करीब 10 करोड़ सैनिकों ने हिस्सा लिया जिनमें से 5 से 7 करोड़ लोगों की जान चली गई और 2 करोड़ से अधिक लोग घायल हुए थे क्योंकि इसके महत्वपूर्ण घटनाक्रम में असैनिक नागरिकों का नरसंहार (जिसमें होलोकॉस्ट भी शामिल है) और परमाणु हथियारों का एकमात्र इस्तेमाल भी शामिल है….. युद्ध के आखिर में मित्र राष्ट्रों की जीत हुई लेकिन ये आधुनिक मानव इतिहास का सबसे भयंकर युद्ध था…. जहां एक तरफ इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका जैसे ताकतवर देश थे तो दूसरी तरफ जर्मनी (एडोल्फ हिटलर), इटली (बेनिटो मुसोलिनी) और जापान जैसे देश थे । सोवियत रूस प्रारंभ में जर्मनी के साथ था परन्तु बाद में जर्मनी ने उसपर आक्रमण कर दिया तो वह इंग्लैंड, फ्रांस के साथ मिल गया लेकिन जर्मनी और इटली ने मिलकर संयुक्त रूप से इंग्लैंड एवं फ्रांस पर आक्रमण कर दिया, अंत में अमेरिका ने जापान के दो नगरों हिरोशिमा और नागासाकी पर अणु बम का प्रयोग किया, उसके बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया… बाद में जर्मनी एवं इटली ने भी हथियार डाल दिये (हिटलर ने आत्म-हत्या कर ली) इस तरह से द्वितीय विश्व युद्ध का समापन हो गया। द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत इंग्लैंड एवं फ्रांस का एम्पायर भी कमजोर हो गया और कुछ ही सालो में इन दोनों के अधीन अनेक देश स्वतंत्र हो गये लेकिन अमेरिका विश्वशक्ति के रूप में काबिज हो गया लेकिन दूसरी और सोवियत रूस ने अमेरिका को तब से अब तक कड़ी टक्कर दे रखी है और नंबर वन बनने की अमेरिका की चाहत पर रोक लगा रखी है…. द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्ति के बाद विश्व में शांति स्थापित करने के नाम पर अमेरिका ने अपना दबदबा बनाये रखने के लिये संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की और मुख्यालय अमेरिका न्यूयार्क शहर में बनाया।

भारत इस समय अपनी निरपेक्ष एवं किसी के भी प्रति खुलकर संलग्न होकर साथ में नहीं आकर सही बात रखने की नीति के कारण ही आज दुनिया में एक भरोसा रखने वाला देश है,
और दुनिया एक लोकतांत्रिक परिपेक्ष में भारत पर भरोसा भी करने लगी है तथा यही कारण है कि भारत को बहुत सारे अवसरों पर अंतरराष्ट्रीय पटल पर एवं यूएनओ में भी अलग अलग समय पर बिना मांगे ही वोट मिलते रहें है, और भारत की भौगोलिक स्थिति अपने आसपास सन्निकट चीन व पाकिस्तान की चुनौतियों के मद्देनजर भी हमेशा अपने हितों को साधते हुए तटस्थ बने रहने की एक रणनीतिक आवश्यकता भी भारत को बहुत सोच समझकर ही कदम उठाने को हमेशा प्रेरित करता रहा है,
जहाँ तक संभव हो भारत को इस तरह के संकट व समय में निष्पक्ष ही बने रहना चाहिए,

क्योंकि भारत अगर ऐसे समय में रूस का साथ न देकर अगर अमेरीका व नाटो देशों का साथ देता है तो भारत की शक्ति व सामरिक संतुलन प्रभावित होती है क्योंकि भारत में ज्यादातर हथियार रसियन मेड ही है और वे भारत के पास किराये पर भी है तथा बहुत सारे ख़रीदे हुए भी है मगर उनका असला-एम्युनिशन भी रूस से ही आता है उसके बिना वे खिलोने मात्र है और ऐसी स्थिति में रूस सबसे पहले अपने सभी सामरिक हथियार और वाहन (पनडुब्बिया-जहाज-विमान इत्यादि) जो भारत के पास है को उन्हें युद्ध में जरूरत है, कहकर वापिस भी सकता है अथवा सप्लाई बंद कर सकता है..
चीन तो ऐसी ही किसी मौके की तलाश में है (चीन अपना स्टेण्ड पहले भी क्लियर कर चूका है कि वो रूस के साथ है) तो किलसा हुआ रूस चीन को भारत को सबक सिखाने का इशारा न भी करे तो चीन ऐसा मौका छोड़ेगा नहीं और चीन के एक्शन में आते ही अमेरिका समेत सभी नाटो देश एक्शन में आ जायेंगे
(नाटो देश इसी इंतजार में है कि भारत-चीन या रूस में से कोई एक शुरुआत करे ताकि इल्जाम उन पर न आये, (क्योंकि विश्वयुद्ध के पश्चात जो देश जिम्मेदार होता है उसे बहुत कुछ भुगतना पड़ता है इसीलिये अमेरिका समेत नाटो देश यूक्रेन की सीधी मदद नहीं कर रहे है)

तीसरे #विश्वयुद्ध के #मायने

अगर तीसरा विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो ये 90% तक दुनिया के जीव-जगत का खात्मा कर देगा क्योंकि ये शुरू होने के बाद पता नहीं कितने साल तक चलेगा, जिसमे परमाणु से लेकर एटमिक पॉवर तक सारे खतरनाक (रासायनिक और जैविक दोनों तरह के) हथियार इस्तेमाल भी हो सकते है,
इसके अलावा देशीय युद्धों के अलावा अंतर्देशीय युद्ध भी होंगे जो धर्म के नाम पर सांप्रदायिक लोग करेंगे ताकि विश्वयुद्ध की आड़ में अपने विरोधी धर्मो का नाश कर सके। गोरे-काले, लाल-पीले वर्ण वाले मनुष्य अपनी नस्लों के आधार पर दूसरी नस्लों से भिड़ेंगे….विश्वयुद्ध के अंत में जमीने रहने लायक नहीं बचेंगी क्योंकि अत्यंत उच्चस्तरीय रेडिएशन होगा जिससे पशु-पक्षी भी नहीं बचेंगे और वनस्पतियां नष्ट हो जायेगी… जैविक महामारियों और वायरसो की इतनी अधिकता होगी की बचा हुआ जीव-जगत पूरी तरह से समाप्त हो जायेगा
(हो सकता है सभ्य मनुष्य जाति पूर्ण रूप से नष्ट हो जाये)

अटकलों और वास्तविक द्विदेशीय संघर्ष अब सैन्य कार्यवाही में बदल चूका है और रूस की सेना ने यूक्रेन में पूरी ताकत के साथ प्रवेश कर लिया है ताकि यूक्रेन पर रूस का कब्ज़ा हो और अमेरिका समेत नाटो देशो को यूक्रेन और कालासागर से दूर रखा जा सके !

कोई भी द्विदेशीय युद्ध किसी तीसरे पक्ष,देश,शक्ति के किसी प्रकार के गैर जिम्मेदाराना दखल व व्यवहार से कभी भी अंतरर्देशीय अथवा बहुदेशीय संघर्ष को जन्म दे सकता है और एक बार ऐसा संकट संघर्ष शुरू होने के बाद खत्म कर पाना किसी के भी हाथ व नियंत्रण की बात नहीं रह जाता,
वो भी ऐसे समय के दौर में जहाँ पूरा विश्व परमाणु,जैविक,रासायनिक हथियारों के जखीरे,ढ़ेर पर बैठा हुआ है,
ये सुंदर,दुनिया, मानव सभ्यता के ऐसे विनाश का कारण भी बन सकता है जहाँ से वापसी और पुनर्रचना सम्भव ही न हो।।

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